Vishwa Hindu Mahasangh Bharat

मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा हो, हिंदू धार्मिक स्थलों पर राजनीति बंद हो”- Vishwa Hindu Mahasangh Bharat

विश्व हिन्दू महासंघ भारत (Vishwa Hindu Mahasangh Bharat) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने देशभर में मंदिरों और हिंदू धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि सनातन संस्कृति और मंदिरों की गरिमा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था की आत्मा हैं, इसलिए उनकी संपत्तियों और धार्मिक परंपराओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रमोद त्यागी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से मंदिरों की जमीनों, धार्मिक संपत्तियों और प्राचीन स्थलों पर अवैध कब्जों तथा विवादों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों से हिंदू समाज में चिंता और असंतोष का माहौल बनता है। उन्होंने कहा कि सरकारों और प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से कार्य करना चाहिए ताकि धार्मिक स्थलों की गरिमा और सुरक्षा बनी रहे।

“मंदिर भारतीय संस्कृति की पहचान हैं”

Vishwa Hindu Mahasangh Bharat के अध्यक्ष ने कहा कि भारत की पहचान उसकी सनातन संस्कृति और धार्मिक विरासत से है। मंदिर सदियों से केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं रहे, बल्कि समाज सेवा, शिक्षा, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना के प्रमुख केंद्र भी रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देश के लाखों लोग अपनी भावनाओं और विश्वास के साथ मंदिरों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में मंदिरों से संबंधित मुद्दों को राजनीतिक विवादों का हिस्सा बनाना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म और राजनीति को अलग रखना ही समाज और राष्ट्रहित में बेहतर होगा।

हिंदू धार्मिक स्थलों पर राजनीति रोकने की मांग

प्रमोद त्यागी ने कहा कि कई बार मंदिरों और धार्मिक आयोजनों को लेकर अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिलती है, जिससे सामाजिक माहौल प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों में संवेदनशीलता और संतुलन बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मंदिरों की संपत्तियों, धार्मिक स्थलों और सनातन परंपराओं को किसी भी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए धार्मिक आस्थाओं का सम्मान आवश्यक है।

मंदिरों की संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड बनाने की मांग

Vishwa Hindu Mahasangh Bharat ने मांग की कि देशभर में मंदिरों की जमीनों और धार्मिक संपत्तियों का पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए। प्रमोद त्यागी ने कहा कि कई स्थानों पर वर्षों पुरानी मंदिर संपत्तियों पर अवैध कब्जों की शिकायतें आती रहती हैं।

उन्होंने कहा कि अगर समय रहते रिकॉर्ड व्यवस्था मजबूत की जाए और नियमित निगरानी रखी जाए तो भविष्य में विवादों को रोका जा सकता है। उन्होंने प्रशासन से मंदिरों की भूमि और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाने की भी मांग की।

सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर समाज से एकजुट होने की अपील

प्रमोद त्यागी ने हिंदू समाज से संगठित रहने और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक होने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सनातन संस्कृति, धार्मिक इतिहास और मंदिरों की महत्ता के बारे में जानकारी देना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी विरासत के प्रति सजग रहेगा तभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने युवाओं से भी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों के संरक्षण को लेकर सरकार की सराहना

प्रमोद त्यागी ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में कानून व्यवस्था और धार्मिक स्थलों के संरक्षण को लेकर किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में धार्मिक आयोजनों, तीर्थ स्थलों और मंदिर क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा, बड़े धार्मिक आयोजनों और मंदिर क्षेत्रों में व्यवस्थाओं को लेकर सरकार द्वारा किए गए प्रयासों से श्रद्धालुओं में विश्वास बढ़ा है। साथ ही धार्मिक पर्यटन और मंदिर विकास को भी गति मिली है।

प्रमोद त्यागी ने कहा कि सुशासन और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था के चलते उत्तर प्रदेश में धार्मिक वातावरण अधिक सुरक्षित महसूस हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मंदिर संपत्तियों की सुरक्षा और अवैध कब्जों के खिलाफ भी भविष्य में और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

“धर्म समाज को जोड़ने का माध्यम बने”

विश्व हिन्दू महासंघ भारत के अध्यक्ष ने कहा कि धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना और सकारात्मक दिशा देना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है जहां सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है, लेकिन सनातन संस्कृति और मंदिरों की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। समाज को बांटने के बजाय धार्मिक मूल्यों के माध्यम से एकता और भाईचारे को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलता है लाभ

प्रमोद त्यागी ने कहा कि मंदिर और धार्मिक स्थल केवल आस्था का केंद्र नहीं बल्कि लाखों लोगों की आजीविका से भी जुड़े हुए हैं। धार्मिक पर्यटन से स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और छोटे कारोबारियों को बड़ा लाभ मिलता है।

उन्होंने कहा कि अगर धार्मिक स्थलों का बेहतर विकास और संरक्षण किया जाए तो इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना बयान

प्रमोद त्यागी का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया और धार्मिक संगठनों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों को राजनीति से दूर रखने की मांग का समर्थन किया है।

हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब समाज अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहा है और लोग इन मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं।

विश्व हिन्दू महासंघ भारत जल्द चलाएगा जनजागरण अभियान

सूत्रों के अनुसार Vishwa Hindu Mahasangh Bharat आने वाले समय में मंदिर सुरक्षा, सनातन जागरूकता और धार्मिक विरासत संरक्षण को लेकर विभिन्न जिलों में व्यापक जनजागरण अभियान भी शुरू कर सकता है। संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि समाज को अपनी संस्कृति और धार्मिक धरोहर के प्रति जागरूक करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

विश्व हिन्दू महासंघ भारत के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में मंदिरों, सनातन परंपराओं और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा, धार्मिक स्थलों को राजनीति से दूर रखने और सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर उठाई गई Vishwa Hindu Mahasangh Bharat  मांग अब सामाजिक और धार्मिक हलकों में प्रमुख चर्चा का विषय बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे समाज और राजनीति दोनों के केंद्र में बने रह सकते हैं।