नर्मदापुरम/नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम सेशंस कोर्ट द्वारा मॉब लिंचिंग के एक मामले में 14 ‘गोरक्षकों’ को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद पूरे देश में भारी बवाल मच गया है। इस न्यायिक निर्णय ने देशभर में गौ संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं और हिंदू संगठनों के बीच एक तीखी और गंभीर बहस छेड़ दी है। विश्व हिंदू महासंघ भारत (vishwa hindu mahasangh bharat) ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे हिंदू विरोधी करार दिया है और सीधे तौर पर जज की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।
“मुस्लिम जज को तुरंत हटाया जाए”
विश्व हिंदू महासंघ भारत (vishwa hindu mahasangh bharat) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी (एडवोकेट) ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अपने आक्रामक बयान में साफ कहा, “यह फैसला पूरी तरह से अस्वीकार्य है। सरकार को तुरंत इस मुस्लिम जज को बर्खास्त करना चाहिए और इस तरह के फैसलों पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। यह भारत की जनभावनाओं के विरुद्ध है और पूरी तरह से एंटी-हिंदू है।”
प्रमोद त्यागी का यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है और गौ रक्षकों के समर्थन में एक बड़ा राष्ट्रीय नैरेटिव तैयार कर रहा है। उनका मानना है कि यह सजा न्याय नहीं, बल्कि बहुसंख्यक समाज की आस्था को ठेस पहुंचाने का एक प्रयास है।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा: वायरल हो रहा विवादित पोस्टर
न्यायालय का फैसला आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आक्रोश की लहर दौड़ गई है। इंटरनेट पर एक फाइल और पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सीधे तौर पर अदालत और जज पर निशाना साधा गया है। इस वायरल पोस्टर में लिखा गया है— “मुसलमान को कौन जज बना दिया भारत में, उसके लिए तो पाकिस्तान है।”

पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाते हुए पूछा गया है कि भारत का कानून सिर्फ हिंदुओं पर ही क्यों लागू हो रहा है? साथ ही यह भ्रामक दावा भी किया जा रहा है कि 14 ‘गांव रक्षकों’ को फांसी की सजा सुना दी गई है (जबकि कोर्ट ने उम्रकैद दी है)। इस पोस्टर ने मामले को और अधिक भड़काऊ बना दिया है, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा है, “भारत में हिंदुओं के साथ साजिश हो रही है।”
क्या है नर्मदापुरम लिंचिंग का पूरा मामला?
यह पूरा विवाद अगस्त 2022 की एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि गौ तस्करी के संदेह में अमरावती (महाराष्ट्र) के रहने वाले नजीर अहमद नाम के एक व्यक्ति को भीड़ ने रोक लिया था। इस दौरान हुई कथित मारपीट में नजीर अहमद की मौत हो गई थी और दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई करते हुए नर्मदापुरम की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज तबस्सुम खान ने 14 लोगों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 341, 148, 307/149 और 302/149 के तहत दोषी ठहराया। इनमें दीपक उर्फ बाबा केवट, अज्जू राठौड़, प्रकाश कौशल, चेतन मराठा सहित कुल 14 आरोपी शामिल हैं।
जज तबस्सुम खान ने अपने फैसले में टिप्पणी की थी कि “आरोपियों ने एक गैर-कानूनी भीड़ बनाई और घातक हथियारों से लैस होकर दंगा किया। पीड़ित के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे नजीर अहमद की मौत हो गई।”
संगठन की आगे की रणनीति: “सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे”
प्रमोद त्यागी ने स्पष्ट किया है कि विश्व हिंदू महासंघ भारत (vishwa hindu mahasangh bharat) इस फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषसिद्धि और सजा के आधारों का कानूनी परीक्षण उच्च न्यायालय और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय में भी किया जाएगा।
त्यागी ने केंद्र और राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा, “करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े गौ संरक्षण के विषय पर सरकारों को स्पष्ट एवं प्रभावी नीति अपनानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे विवाद और टकराव की स्थितियां उत्पन्न न हों। हम इस पूरे प्रकरण के सभी पहलुओं की व्यापक और निष्पक्ष कानूनी समीक्षा करवाएंगे।”
अंत में उन्होंने यह भी जोड़ा कि न्यायिक निर्णयों पर असहमति जताना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और अंतिम सत्य उच्च न्यायिक मंचों पर होने वाली सुनवाई के बाद ही सामने आएगा
