Vishwa Hindu Mahasangh Bharat संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी एडवोकेट ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम और उनकी छवि का कथित रूप से दुरुपयोग कर स्वयं को अधिकृत या समर्थित बताने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री की गरिमा और मुख्यमंत्री कार्यालय की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इस संबंध में प्रमोद त्यागी ने मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात ओएसडी द्वारिका तिवारी को संबोधित एक ज्ञापन भेजकर पूरे प्रकरण की जांच कराने तथा मुख्यमंत्री के नाम का कथित दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
मथुरा में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जताई आपत्ति
प्रमोद त्यागी एडवोकेट ने आरोप लगाया कि मथुरा में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार में कुछ स्वयंभू पदाधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम और प्रतिष्ठा का उपयोग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि इस प्रकार का प्रचार आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है तथा इससे यह संदेश जा सकता है कि संबंधित कार्यक्रम या संगठन को मुख्यमंत्री कार्यालय का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने दावा किया कि यदि ऐसा प्रचार बिना किसी अधिकृत अनुमति के किया जा रहा है तो इससे मुख्यमंत्री की सार्वजनिक छवि प्रभावित हो सकती है।
‘कुछ स्वयंभू लोग मुख्यमंत्री के नाम का लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं’
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि कुछ लोग स्वयं को प्रभावशाली बताने तथा निजी लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम का कथित तौर पर उपयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास न केवल भ्रामक हैं बल्कि मुख्यमंत्री की निष्पक्ष और पारदर्शी छवि को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में किसी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के नाम का निजी संगठनात्मक विवादों में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
ओएसडी द्वारिका तिवारी को भेजा विस्तृत ज्ञापन
प्रमोद त्यागी द्वारा भेजे गए ज्ञापन में मुख्यमंत्री कार्यालय के ओएसडी द्वारिका तिवारी से पूरे मामले पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्टर प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें कुछ लोग स्वयं को मुख्यमंत्री कार्यालय या वरिष्ठ अधिकारियों का निकटस्थ बताकर अपने संगठन या गुट को वैध सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं।
ज्ञापन के अनुसार, ऐसे पोस्टरों में अधिकारियों के नाम और तस्वीरों का इस प्रकार उपयोग किया गया है कि आम व्यक्ति यह मान सकता है कि संबंधित अधिकारी किसी विशेष संगठनात्मक विवाद में एक पक्ष के साथ खड़े हैं।
‘सामान्य मुलाकात या फोटो को समर्थन नहीं माना जा सकता’
ज्ञापन में प्रमोद त्यागी ने कहा कि यदि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या औपचारिक अवसर पर किसी अधिकारी अथवा जनप्रतिनिधि के साथ किसी व्यक्ति की मुलाकात हो जाती है या तस्वीर खिंच जाती है, तो इसका अर्थ यह नहीं लगाया जा सकता कि संबंधित अधिकारी उस व्यक्ति या संगठन का समर्थन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सामान्य शिष्टाचार भेंट अथवा सार्वजनिक मंच पर ली गई तस्वीरों को संगठनात्मक समर्थन के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक हो सकता है।
संगठनात्मक विवाद में मुख्यमंत्री कार्यालय का नाम जोड़ने पर जताई चिंता
प्रमोद त्यागी ने ज्ञापन में यह भी कहा कि वर्तमान में विश्व हिंदू महासंघ से जुड़े आंतरिक विवादों के बीच कुछ पोस्टरों और प्रचार सामग्री के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा वरिष्ठ अधिकारी किसी एक पक्ष के साथ हैं।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा प्रचार जानबूझकर किया जा रहा है तो यह मुख्यमंत्री कार्यालय की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाने जैसा है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
ज्ञापन में उठाईं पांच प्रमुख मांगें
मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे गए ज्ञापन में प्रमोद त्यागी ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं—
• यह स्पष्ट किया जाए कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय या संबंधित अधिकारी ने किसी भी पक्ष को ऐसा कोई समर्थन या प्राधिकरण दिया है।
• यदि ऐसा कोई समर्थन नहीं दिया गया है, तो नाम और पद का कथित दुरुपयोग कर प्रचार करने वालों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई पर विचार किया जाए।
• सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्टरों और प्रचार सामग्री की सत्यता तथा उद्देश्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
• यदि जांच में मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा वरिष्ठ अधिकारियों के नाम के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
• सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया जाए कि किसी अधिकारी के साथ सामान्य मुलाकात या तस्वीर को सरकारी अथवा व्यक्तिगत समर्थन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
‘उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं’
प्रमोद त्यागी ने अपने ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को लक्ष्य बनाना नहीं है।
उन्होंने कहा कि उनकी चिंता केवल इस बात को लेकर है कि किसी भी संवैधानिक पद, मुख्यमंत्री कार्यालय या वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिष्ठा का उपयोग निजी संगठनात्मक विवादों में नहीं होना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है।
जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया का रहेगा इंतजार
फिलहाल इस मामले में ज्ञापन के आधार पर जांच या किसी आधिकारिक कार्रवाई की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों की ओर से भी इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे यदि मुख्यमंत्री कार्यालय, संबंधित अधिकारियों अथवा जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
Vishwa Hindu Mahasangh Bharat के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी एडवोकेट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम और मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रतिष्ठा के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने ओएसडी द्वारिका तिवारी को ज्ञापन भेजकर सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रचार सामग्री की जांच कराने तथा यदि किसी स्तर पर नाम या पद के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। इस मामले में संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संभावित जांच के परिणाम का इंतजार रहेगा।
